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Chinese Military To Get Bp Jacket And Helmet Against Chinese Bullet – चीन की गोली से मुकाबले में सेना को मिलेगी चीनी मटेरियल की बीपी जैकेट और हेलमेट

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केंद्र की मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में दो अहम निर्णय को मंजूरी दे दी है। बुलट प्रूफ जैकेट और हेलमेट में चीन से आयातित मटेरियल के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। इंफैंट्री के लिए 1.86 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति करने वाली कंपनी एसएम पल्प चीन से आयातित मटेरियल के जरिए बुलेट प्रूफ जैकेट देने की तैयारी में व्यस्त है।

अमर उजाला ने काफी पहले से बुलेट प्रूफ जैकेट को दे पाने में आ रही दुश्वारियों पर खबरे प्रकाशित की हैं। अब बारी हेडसेट से युक्त हेलमेट की है। 50 हजार से अधिक हेडसेट युक्त हेलमेट की आपूर्ति का ठेका पाने वाली कंपनी ने भी टेंडर के नियम को बाईपास कर रही है। कंपनी ने भी लक्ष्मण रेखा पार करके कोरिया से आयातित उपकरण के जरिए आपूर्ति करना चाह रही है।

बुलेट प्रूफ जैकेट

अप्रैल 2018 में भारतीय सेना के लिए 1.86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति का ठेका एल वन होने के कारण एसएम पल्प को मिला था। इस टेंडर में टाटा डिफेंस, एमकेयू जैसी अन्य कंपनियां भी दावेदार थी। यह बुलेट प्रूफ जैकेट जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रही चुनौतियों के मद्देनजर जरूरी थी। सीमापार के आतंकी चीन में बनी स्टील बुलट(गोली) का इस्तेमाल कर रहे थे और इन गोलियों को झेल पाने में इंफैट्री की मौजूदा जैकेट फेल हो रही थी। 

ठेका पाने वाली एसएम पल्प कंपनी ने अपनी जैकेट में नीदरलैंड समेत अन्य देश से कच्चा माल आयात करके विश्वस्तरीय जैकेट देने का वादा किया था। इस क्रम में कंपनी को एक साल के भीतर मार्च 2019 तक 36 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति करनी थी, लेकिन कंपनी इसमें फेल हो चुकी है। बताते हैं एसएम पल्प ने बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति के लिए चीन से आयातित कच्चे माल के प्रयोग की अनुमति मांगी है। 

सूत्र बताते हैं कि कंपनी के प्रभाव के चलते उसे टेंडर की शर्त में इस बदलाव की अनुमति दे दी गई है। अब एसएम पल्प चीन से आयातित कच्चे माल को आयात करके मार्च 2019 के अंत तक 10 हजार जैकेट के पहले लॉट की आपूर्ति कर सकती है। हालांकि सेना मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि वह बिना पूरी तरह से गुणवत्ता की जांच-पड़ताल लिए एक भी जैकेट को स्वीकार नहीं करेंगे। 

हेलमेट में बदल सकती है शर्त

इसी तरह से इफैंट्री को आतंकियों और दुश्मन से मुकाबले के लिए हेलमेट चाहिए। गुणवत्ता पूर्ण हेलमेट की इस आपूर्ति में एमकेयू अव्वल (एल वन) रही। एमकेयू को 50 हजार से अधिक हेडसेट (कम्युनिकेशन सिस्टम) से युक्त हेलमेल की आपूर्ति करना है। सूत्र बताते हैं कि एमकेयू का जो सैम्पल एलवन आया था, उसमें मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाते हुए कानपुर की कंपनी एमकेयू ने अपना हेलमेट और बैंगलोर की शक्तिवेल से साझा उपक्रम करके उसका हेडसेट प्रस्तुत किया था। यही सैंपल पास हुआ। लेकिन एमकेयू अब शक्तिवेल से हेडसेट लेकर हेडसेट के साथ हेलमेट की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। 

सूत्र बताते हैं कि एमकेयू ने बिना शक्तिवेल को कोई जानकारी दिए कोरिया से आयातित हेडसेट को हेलमेट में फिट करके आपूर्ति करने की प्रक्रिया शुरू की। इस पर शक्तिवेल ने रक्षा मंत्रालय को टेंडर और नियम की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पत्र लिखा। लेकिन एमकेयू के प्रभाव के कारण शक्तिवेल सफल नहीं हो पाई। इसके बाद शक्तिवेल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। बताते हेडसेट विद हेलमेट की आपूर्ति के लिए एमकेयू ने भी कोरिया से आयातित उपकरण से युक्त प्रोडक्ट दे दिया है। इसका बेंग्लुरू में परीक्षण चल रहा है।
 
रक्षा मंत्रालय को साजो-सामान की आपूर्ति करने वाले सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय के आमंत्रण प्रस्ताव से लेकर टेंडर की शर्तों को यह साफ-साफ उल्लंघन है। टाटा डिफेंस के एक अधिकारी का कहना है कि बुलेट प्रूफ जैकेट से लेकर हेलमेट, हेडसेट या चाहे जो भी रक्षा सामान की आपूर्ति करना चाहें, उसकी ए-टू जेड जानकारी सरकार के पास देनी होती है। बताना होता है कि बुलेट प्रूफ जैकेट का आगे का कपड़ा क्या होगा, गुणवत्ता क्या होगी, कहां से आएगा (आयात या निर्माण)। 

जैकेट के भीतर पहली लेयर, दूसरी लेयर…आखिरी लेयर और फिर पीछे के का कपड़ा सबकुछ। उसी तरह से तैयार करके सैंपल देना होता है और एलवन आने के बाद ठेका पाने वाली कंपनी को वहीं गुणवत्ता देनी होती है। इस रक्षा सामान को तैयार करने के लिए इसके किसी घटक सामान, उसके आने या आयात के विवरण में कोई बदलाव करना टेंडर के नियम और शर्तों का उल्लंघन माना जाता है। सूत्र का कहना है कि वह जल्द ही सेना के हथियार और उपकरण विभाग को पत्र लिखेंगे।

चीन से करते हैं परहेज

एक अन्य रक्षा उत्पादक का कहना है कि सैनिकों की सुरक्षा, चुनौती और तमाम पक्षों को देखते हुए बुलेट प्रूफ जैकेट या हेलमेट समेत अन्य में चीन के सामान के आयात से परहेज किया जाता है। बताते हैं गृहमंत्रालय और रक्षा मंत्रालय समेत कुछ क्षेत्र में खास सावधानी बरती जाती है। इसको लेकर विभाग भी संवेदनशील रहते हैं। ऐसे में उन्हें यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि आखिर सरकार, सेना के स्तर उपरोक्त कंपनियों को यह अनुमति कैसे दी जा सकती है।    

बड़ा सवाल

गृह मंत्रालय ने अपने नियम कड़े कर दिए हैं। अब सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी समेत अन्य को रक्षा साजो सामान आपूर्ति करने वाली कंपनियों को स्पेसिफिकेशन का पूरा पालन करना होगा। उन्हें इंडस्ट्रियल लाइसेंस के साथ ही सुरक्षा बलों के लिए जरूरी रक्षा साजो सामान के टेंडर में शामिल होना होगा। बताते हैं रक्षा मंत्रालय देशों से आयातित सामान के मामले में भी बेहद संवेदनशील है। जबकि रक्षा मंत्रालय में अभी यह प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई है। नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

केंद्र की मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में दो अहम निर्णय को मंजूरी दे दी है। बुलट प्रूफ जैकेट और हेलमेट में चीन से आयातित मटेरियल के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। इंफैंट्री के लिए 1.86 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति करने वाली कंपनी एसएम पल्प चीन से आयातित मटेरियल के जरिए बुलेट प्रूफ जैकेट देने की तैयारी में व्यस्त है।

अमर उजाला ने काफी पहले से बुलेट प्रूफ जैकेट को दे पाने में आ रही दुश्वारियों पर खबरे प्रकाशित की हैं। अब बारी हेडसेट से युक्त हेलमेट की है। 50 हजार से अधिक हेडसेट युक्त हेलमेट की आपूर्ति का ठेका पाने वाली कंपनी ने भी टेंडर के नियम को बाईपास कर रही है। कंपनी ने भी लक्ष्मण रेखा पार करके कोरिया से आयातित उपकरण के जरिए आपूर्ति करना चाह रही है।

बुलेट प्रूफ जैकेट

अप्रैल 2018 में भारतीय सेना के लिए 1.86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति का ठेका एल वन होने के कारण एसएम पल्प को मिला था। इस टेंडर में टाटा डिफेंस, एमकेयू जैसी अन्य कंपनियां भी दावेदार थी। यह बुलेट प्रूफ जैकेट जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रही चुनौतियों के मद्देनजर जरूरी थी। सीमापार के आतंकी चीन में बनी स्टील बुलट(गोली) का इस्तेमाल कर रहे थे और इन गोलियों को झेल पाने में इंफैट्री की मौजूदा जैकेट फेल हो रही थी। 

ठेका पाने वाली एसएम पल्प कंपनी ने अपनी जैकेट में नीदरलैंड समेत अन्य देश से कच्चा माल आयात करके विश्वस्तरीय जैकेट देने का वादा किया था। इस क्रम में कंपनी को एक साल के भीतर मार्च 2019 तक 36 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति करनी थी, लेकिन कंपनी इसमें फेल हो चुकी है। बताते हैं एसएम पल्प ने बुलेट प्रूफ जैकेट की आपूर्ति के लिए चीन से आयातित कच्चे माल के प्रयोग की अनुमति मांगी है। 

सूत्र बताते हैं कि कंपनी के प्रभाव के चलते उसे टेंडर की शर्त में इस बदलाव की अनुमति दे दी गई है। अब एसएम पल्प चीन से आयातित कच्चे माल को आयात करके मार्च 2019 के अंत तक 10 हजार जैकेट के पहले लॉट की आपूर्ति कर सकती है। हालांकि सेना मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि वह बिना पूरी तरह से गुणवत्ता की जांच-पड़ताल लिए एक भी जैकेट को स्वीकार नहीं करेंगे। 

हेलमेट में बदल सकती है शर्त

इसी तरह से इफैंट्री को आतंकियों और दुश्मन से मुकाबले के लिए हेलमेट चाहिए। गुणवत्ता पूर्ण हेलमेट की इस आपूर्ति में एमकेयू अव्वल (एल वन) रही। एमकेयू को 50 हजार से अधिक हेडसेट (कम्युनिकेशन सिस्टम) से युक्त हेलमेल की आपूर्ति करना है। सूत्र बताते हैं कि एमकेयू का जो सैम्पल एलवन आया था, उसमें मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाते हुए कानपुर की कंपनी एमकेयू ने अपना हेलमेट और बैंगलोर की शक्तिवेल से साझा उपक्रम करके उसका हेडसेट प्रस्तुत किया था। यही सैंपल पास हुआ। लेकिन एमकेयू अब शक्तिवेल से हेडसेट लेकर हेडसेट के साथ हेलमेट की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। 

सूत्र बताते हैं कि एमकेयू ने बिना शक्तिवेल को कोई जानकारी दिए कोरिया से आयातित हेडसेट को हेलमेट में फिट करके आपूर्ति करने की प्रक्रिया शुरू की। इस पर शक्तिवेल ने रक्षा मंत्रालय को टेंडर और नियम की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पत्र लिखा। लेकिन एमकेयू के प्रभाव के कारण शक्तिवेल सफल नहीं हो पाई। इसके बाद शक्तिवेल ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। बताते हेडसेट विद हेलमेट की आपूर्ति के लिए एमकेयू ने भी कोरिया से आयातित उपकरण से युक्त प्रोडक्ट दे दिया है। इसका बेंग्लुरू में परीक्षण चल रहा है।
 


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