Home - Hindi News - Lok Sabha Elections 2019: How Alliance Taking Shape And Bjp Congress Strategy Goes On – आम चुनाव 2019: गठबंधन का दौर और दलबदल का सिलसिला…भाजपा और कांग्रेस में किसका पलड़ा भारी?

Lok Sabha Elections 2019: How Alliance Taking Shape And Bjp Congress Strategy Goes On – आम चुनाव 2019: गठबंधन का दौर और दलबदल का सिलसिला…भाजपा और कांग्रेस में किसका पलड़ा भारी?

भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला
– फोटो : अमर उजाला

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लोकसभा चुनाव 2019 का महासंग्राम अब चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। इस बार का मुकाबला अब तक का सबसे दिलचस्प और कांटे का मुकाबला साबित होने जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस छोटे-बड़े दलों को अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हैं। इससे इतर बड़े क्षेत्रीय दल भी तीसरा मोर्चा बनाने की जुगत में लगे हैं। हालांकि अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है। जानने की कोशिश करते हैं कि भाजपा और कांग्रेस किस तरह से अपनी रणनीति बना रहे हैं और नेताओं के दलबदल का सिलसिला कैसे आगे बढ़ रहा है। 

भाजपा की रणनीति 

छोटे दलों और दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में करने का काम भाजपा बखूबी कर रही है। चुनाव तारीखों का एलान होने से पहले ही वह कई दलों के साथ गठबंधन को अंतिम रूप दे चुकी है। सबसे पहले उसने एक साल से नाराज चल रही शिवसेना को मनाया। 18 फरवरी को दोनों के बीच महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों को लेकर सहमति बन गई। इसने विपक्ष की रणनीति को पूरी तरह गड़बड़ा दिया। यहां 48 लोकसभा सीटें हैं जो लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बेहद अहम हैं। 2014 चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने 41 सीटों पर कब्जा जमाया था।

इसके बाद भाजपा ने दक्षिण को लेकर भी अपनी रणनीति को पुख्ता करते हुए तमिलनाडु में अहम गठबंधन किया। यहां 39 सीटें हैं। 2014 में अन्नाद्रमुक ने 37 सीटें जीती थीं। 19 फरवरी को भाजपा ने यहां अन्नाद्रमुक और पीएमके के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी करते हुए विपक्ष को बैकफुट पर डाल दिया। हालांकि अगले दिन कांग्रेस और द्रमुक ने भी समझौता कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। बिहार में पार्टी पहले ही जनता दल यू के साथ गठजोड़ कर चुकी है। 

दलबदल का सिलसिला तेज 

तमाम नेताओं का दल बदलने का सिलसिला भी जोर पकड़ चुका है और इसमें भाजपा में आने वालों की संख्या ज्यादा दिख रही है। अबतक वह विपक्षी दलों के कई नेताओं को अपने पाले में कर चुकी है। खासतौर पर उसने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस को बड़े झटके दिए हैं।  गुजरात में 4 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो गए। आज यानि 14 मार्च को ही केरल कांग्रेस के बड़े नेता टॉम वडक्कन ने भाजपा का हाथ थाम लिया। 

भाजपा में शामिल हुए ये नेता – 

 

  • टॉम वडक्कन – कांग्रेस प्रवक्ता (14 मार्च)
  • जय पांडा – बीजद सांसद ( 4 मार्च)  
  • अनुपम हाजरा – टीएमसी सांसद (12 मार्च)
  • सुजय विखे पाटिल – महाराष्ट्र कांग्रेस नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे (12 मार्च) 
  • अर्जुन सिंह – टीएमसी विधायक (14 मार्च)
  • सौमित्र खान – टीएमसी सांसद (9 मार्च) 

कांग्रेस का खेमा

भाजपा से मुकाबले के लिए कांग्रेस भी अपनी रणनीति को पुख्ता बनाने में जुटी हुई है। हर मंच से राहुल गांधी भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला करने में जुटे हैं। वह राफेल, नोटबंदी, बेरोजगारी और किसानों का मुद्दा प्रमुखता से उठा रहे हैं। इस बीच कांग्रेस भी अपने खेमे में दूसरे दलों को जोड़ रही है। राज्यवार गठजोड़ को अंजाम दिया जा रहा है। कांग्रेस के खेमे में करीब 24 दल हैं। यूपी में सपा-बसपा से झटका मिलने के बाद उसने महान दल के साथ गठजोड़ किया है। तमिलनाडु में उसे डीएमके का साथ मिला है। कर्नाटक में जेडीएस के साथ उसका गठबंधन हो गया है। इसके अलावा भाजपा सहित दूसरे दलों के कई नेता कांग्रेस का हाथ थाम रहे हैं। चुनाव तारीख के एलान से पहले ही कई नेता कांग्रेस के साथ आ गए थे। 

कांग्रेस में शामिल हुए ये नेता 

  • सांसद नाना पटोले पिछले साल ही ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ चुके हैं। –
  • पाटीदार नेता हार्दिक पटेल 12 मार्च को गांधीनगर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए। 
  • भाजपा की सांसद रहीं सावित्री फुले ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया। वह मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रही थीं। 
  • 4 मार्च को समाजवादी पार्टी सांसद कैसर जहां ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। 
  • 14 मार्च को उत्तराखंड के पूर्व सीएम बीसी खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा उड़ी है। 

किसका पलड़ा भारी? 

गौर करें तो पाएंगे कि भाजपा में जाने वाले नेताओं की संख्या ज्यादा दिख रही है। खासतौर पर टीएमसी के कई बड़े नेता भाजपा का झंडा थाम रहे हैं। प. बंगाल में इस बार भाजपा ही टीएमसी के सामने चुनौती पेश कर रही है। ओडिशा के कई नेताओं ने भी भाजपा का ही दामन थामा है। यहां भी भाजपा ही बीजू जनता दल की मुख्य प्रतिद्वंदी बन गई है। पहले कांग्रेस ही मुख्य मुकाबले में थी, लेकिन अब भाजपा ने अपना असर बढ़ाते हुए दावेदारी मजबूत कर ली है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर और अनुपमा पटेल जैसे नेताओं की नाराजगी दूर होती बताई जा रही है। इनकी तरफ से भाजपा विरोधी बयानों का सिलसिला थम गया है। अगर भाजपा को यूपी में नुकसान होता है तो वह इसकी भरपाई बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर, तमिलनाडु से करने की रणनीति पर काम कर रही है। अगर उसकी ये योजना काम कर गई तो दिल्ली में एक बार फिर कमल खिल सकता है। 

लेकिन कांग्रेस का दावा भी कमजोर नहीं दिखता है। हाल ही में उसने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई है। इन तीन राज्यों में उसे लोकसभा चुनाव के दौरान फायदा जरूर मिलेगा। पंजाब में उसकी सरकार है और गुजरात में भी पिछले विधानसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन जोरदार रहा था। तमिलनाडु और कर्नाटक में उसका अहम गठबंधन हुआ है। ऐसे में 2019 का मुकाबला कांटे का और दिलचस्प होने का अनुमान है।  

लोकसभा चुनाव 2019 का महासंग्राम अब चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। इस बार का मुकाबला अब तक का सबसे दिलचस्प और कांटे का मुकाबला साबित होने जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस छोटे-बड़े दलों को अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हैं। इससे इतर बड़े क्षेत्रीय दल भी तीसरा मोर्चा बनाने की जुगत में लगे हैं। हालांकि अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है। जानने की कोशिश करते हैं कि भाजपा और कांग्रेस किस तरह से अपनी रणनीति बना रहे हैं और नेताओं के दलबदल का सिलसिला कैसे आगे बढ़ रहा है। 

भाजपा की रणनीति 

छोटे दलों और दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में करने का काम भाजपा बखूबी कर रही है। चुनाव तारीखों का एलान होने से पहले ही वह कई दलों के साथ गठबंधन को अंतिम रूप दे चुकी है। सबसे पहले उसने एक साल से नाराज चल रही शिवसेना को मनाया। 18 फरवरी को दोनों के बीच महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों को लेकर सहमति बन गई। इसने विपक्ष की रणनीति को पूरी तरह गड़बड़ा दिया। यहां 48 लोकसभा सीटें हैं जो लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बेहद अहम हैं। 2014 चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने 41 सीटों पर कब्जा जमाया था।

इसके बाद भाजपा ने दक्षिण को लेकर भी अपनी रणनीति को पुख्ता करते हुए तमिलनाडु में अहम गठबंधन किया। यहां 39 सीटें हैं। 2014 में अन्नाद्रमुक ने 37 सीटें जीती थीं। 19 फरवरी को भाजपा ने यहां अन्नाद्रमुक और पीएमके के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी करते हुए विपक्ष को बैकफुट पर डाल दिया। हालांकि अगले दिन कांग्रेस और द्रमुक ने भी समझौता कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। बिहार में पार्टी पहले ही जनता दल यू के साथ गठजोड़ कर चुकी है। 

दलबदल का सिलसिला तेज 

तमाम नेताओं का दल बदलने का सिलसिला भी जोर पकड़ चुका है और इसमें भाजपा में आने वालों की संख्या ज्यादा दिख रही है। अबतक वह विपक्षी दलों के कई नेताओं को अपने पाले में कर चुकी है। खासतौर पर उसने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस को बड़े झटके दिए हैं।  गुजरात में 4 कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो गए। आज यानि 14 मार्च को ही केरल कांग्रेस के बड़े नेता टॉम वडक्कन ने भाजपा का हाथ थाम लिया। 

भाजपा में शामिल हुए ये नेता – 

 

  • टॉम वडक्कन – कांग्रेस प्रवक्ता (14 मार्च)
  • जय पांडा – बीजद सांसद ( 4 मार्च)  
  • अनुपम हाजरा – टीएमसी सांसद (12 मार्च)
  • सुजय विखे पाटिल – महाराष्ट्र कांग्रेस नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे (12 मार्च) 
  • अर्जुन सिंह – टीएमसी विधायक (14 मार्च)
  • सौमित्र खान – टीएमसी सांसद (9 मार्च) 




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